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5 झाड़ा लगाने का मंत्र |

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निम्नलिखित तंत्र मंत्र प्राचीन तंत्र मंत्र साहित्यो से लिए गए हैं! जैसे इंद्रजाल, लाल किताब, शाबर मंत्र संग्रह इत्यादि|

झाड़ा लगाने का मंत्र 1

विधि –   इस मंत्र का जाप करते हुए  21  बार जाड़ा करे तो रोगी के सभी रोग समाप्त हो जायेंगे 

मंत्र –
 उलटंत देह ।
        पलटंत॑ काया।
        उतर आव गुरु ने  बुलाया।
        शेष सत्य नाम आदेश गुरु को ।

झाड़ा लगाने का मंत्र 2

विधि –  इस मंत्र का उच्चारंण करते हुए रोगी को सात बार जाड़ा करे तो किये-किराये के सभी बुरे दोषों से रोगी छुटकारा  पा जाता है।

मंत्र – 
ॐ  रूनुं इ झुनुं।
अमृत मारातं देवी औरं पर तारा। वीर मान्यो वीर तोन्यो।
हांक डांग महि मथन करण जोग।भोग जोग घर छत्तीस नक्षत्र।
धर सर्प ब्रह्माण्डे पति ब्रह्मा के। छाया धौ। देवी धौ। देवता धौ।
डायनी धौ।गुरुराणी धौ।भूत धौ।प्रेत धौ।धर धर मां चण्डी।
बीज करूवाल षंडी। धौर्य वा गुटिनां य दाददली इमान को।
चलते केके जाते। औ रे वीर भैरवी काम रूप काम चण्डी।
धर धर वाकी महा कारण्य करे। गड़रूमारो कुकी धर वारण धरोवलीते।

ते कामरू कामचण्डी। इह माया प्रसारणी। कोटि कोटि आज्ञा देवी काम चण्डी।
बीजे चल षंडी। चोदिगे ऐरलं देवी। वसिला कि मांडि चण्डी।
चन्द्र चमकिले। सूर्य टरिल। ऐरल देवी हरा हरा परि। सुखिला कीट रे जीवो।
परांद्रि वाहंते खप्पर। दाहिने हाथ छुरि। ऐरला देवी अवतारी। डाइनि बांधौ।
गा बांधौ।गुनी बांधूं।मोरा बांधूं।मसानी बांधूं। गुनिया ना सुनि आबे गराठी।
आं बुलावे रांडे। माला डांडे। जीवता डांडे।
हंसे खेले मारिवलन झारो वलिते ते।
ते कामरू काम चण्डी कोटिश आज्ञा।

झाड़ा लगाने का मंत्र – 3

विधि –   इस मंत्र का जाप करते हुए रोगी को सात बार जाड़ा करें या फूंक मारें। सिर से पांव तक धागा नापकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए सात गांठ लगाकर और गूगल की धूनि देकर रोगी के कण्ठ में पहना दें। इस प्रकार उपाय करने से किये-किराये के सभी दोष समाप्त होकर उल्टे टोना करवाने वाले की हानि होती है।

मंत्र –  
ॐ  नमो आदेश गुरु का।
अपर कोष।  बिगड़ कोष। प्रह्माद राख।
पाताल राख। पांव दे बीज। जंघा देवे कालिका।
मस्तक राखे महादेव।
जो कोई इस पिंड-प्राण को छेदे छेदे।
देव, देवता, भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी।
‘कण्ठमाला, तिजारी। एक पहर।दोपहर।
सांझ सवेरे को। किये-कराये को स्वाहा पड़े।
इसकी रक्षा नरसिंह जी करे।

झाड़ा लगाने का मंत्र – 4

विधि –  इस मंत्र का जाप करते हुए रोगी को झाड़ा करने पर किये-कराये सभी दोष समाप्त हो जाते हैं, रोगी रोग से निदान पाता है।

मंत्र –  
ॐ नमो आदेश गुरु का। हरिवा में हरि दाहिने।
हरि हावो विस्तार। आगे पीछे हरि खड़या।
राख्या सिरजन हार। चमक बीजुरी।
गाजन्त नरसिंह। फटत खंभ। आवता काल राख।
चार चक्रलै नरसिंह जी के आगे मेल। इतना सूं दूर जाये पड़े।
प्रातः काल कटक, छल छिद्र, खेचरा, भूचरा,
जलचरा, थलचरा, भूत दाना, नाटक,
चेटक मार मार, रंडी का तीन सौ साठ।
उलटंत नारसिंह पलटंत काया। भगत हेतु श्री नरसिंह आया।
कपिल के सउदर रूप श्री नरसिंह बली।
सदा सहाय। श्री गोबिन्द के चरणारविन्द नमस्ते।
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। ‘फुरो मंत्र ईश्वरोबाचा।

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