मंगल ग्रह का प्रभाव और उपाय

Tantra Mantra

10 मंगल ग्रह का प्रभाव और उपाय

निम्नलिखित मंगल ग्रह का प्रभाव और उपाय लाल किताब बहुत प्रभावशाली है। कुदरती टोटके जो मनुष्य पढ़कर खुद करेगा उसी का कार्य पूर्ण होगा और जो दूसरे को पढ़कर बतायेगा जिसको बतायेगा उसका कार्य नहीं होगा, जो पढ़ेगा और बिना किसी व्यक्ति को बताये करेगा उसी का कार्य सम्पूर्ण होगा।

Tantramantra.in एक विचित्र वेबसाइट है जो की आपके लिए प्राचीन तंत्र मंत्र सिद्धियाँ टोन टोटके पुरे विधि विधान के साथ लाती है. TantraMantra.in कहता है सभी तांत्रिक मित्रों को इन कार्यविधियों को गुरु के मध्य नज़र ही करना चाहिये। तथा इन इलमो को केवल अच्छे कार्य में ही इस्तेमाल करना चाहिए, अन्यथा आपको इसके बुरे परिणाम का सामना खुद ही करना होगा ।

निम्नलिखित तंत्र मंत्र प्राचीन तंत्र मंत्र साहित्यो से लिए गए हैं! जैसे इंद्रजाल, लाल किताब, शाबर मंत्र संग्रह इत्यादि|

 मंगल को अनुकूल करने के लिए टोटके

मंगल ग्रह यदि प्रतिकूल या अनिष्ट फल प्रदर्शित कर रहा हो, तो इस अनिष्ट के  निवारण के लिए अथवा मंगल को अपने अनुकूल करने के लिए निम्न टोटकों का प्रयोग करना चाहिए-

टोटके – 1  किसी भी मंगलवार को सोने के ताबीज में अनंतसूल की जड़ भरकर लाल रंग के सूती धागे से बांधकर पहने।

टोटके – 2  सोने की अंगूठी, गाय के दूध में डुबोकर मंगलवार को प्रातःकाल सूर्योदय के समय धारण करें। इस बात का ध्यान रखें कि यह अंगूठी अनामिका उंगली में धारण की जाती है।

मंगल ग्रह को खुश करने के सरल एवं अचूक उपाय

  • मंगलवार के दिन हनुमान मन्दिर में जाया करें।
  • मिठाई दान करें।
  • मृगछाला का इस्तेमाल करें।
  • रेवड़ियां और बताशे पानी में बहाएं।
  • सफेद सुरमा आंखों में लगाएं।
  • मंगलवार के दिन मसूर की दाल का इस्तमाल न करे |
  • शनि का उपाय करे। 
  • मूंगा धारण करने से भी मंगल उच्च होता है 
  • रोटी में गुड़ लगाकर कुत्ते को खिलाये। 
  • दान धर्म में रूचि रखे और सदा ही आस्तिक बने रहे 

मंगल का शुभ/अशुभ फल

मंगल एक तो ऐसे ही हिंसात्मक है और जब यह कुंडली के छठे और ग्यारहवें हिंसात्मक घरों का मालिक बन जाए और साथ ही अगर केतु अधिष्ठित राशि का मालिक भी हो तो फिर मंगल से बढ़कर हिंस़ा का द्योतक और कोई ग्रह नहीं हो सकता। अब अगर ऐसे मंगल का प्रभाव मन पर पूर्ण हो अर्थात्‌ चौथे घर चन्द्रमा आदि पर सभी पर हो तो मन में इतनी हिंसा की तृत्ति प्रबल हो जाती है। ऐसी कुण्डली बाला व्यक्ति किसी की हत्या तक भी कर सकता है। 

मंगल को दसवें घर में दिग्बल की प्राप्ति होती है (बुध और बृहस्पति लग्न (पहले घर) में रहने पर, चंद्रमा और शुक्र चौथे घर में रहने पर, शनिसातवें घर में रहने पर तथा सूर्य और मंगल दसवें घर में मौजूद रहने पर दिग्बली होते हैं)। इसलिए दसवें से सातवें अर्थात्‌ चौथे घर में नीच राशि कर्क में स्थित हो तो और भी शक्तिहीन होकर चौथे तथा पहले घर को नुक्सान पहुँचाएगा। ऐसे जातक को छाती के कोई-न-कोई रोग, जैसे अस्थमा (दमा), क्षय आदि की संभावना

रहती है। विशेषतया ऐसी हालत में जबकि मंगल घर कोई शुभ दृष्टि भी न हो। लग्न उसका मालिक, आठवां घर और उसका मालिक पर पड़ने वाला प्रभाव मृत्यु के ढंग को बतलाता है, अत: यदि इन सब पर मंगल का प्रभाव हो विशेषतया तब जबकि मंगल केतु अधिष्ठित राशि का स्वामी हो या छठे या ग्यारहवें घर का स्वामी या मालिक हो, तो ‘ऐसे जातक की मृत्यु हत्या द्वारा संभावित है। उस समय तो अवश्य जब दूसरे और आठवें घर के स्वामी का भी मृत्यु लाने में हाथ हो।

मंगल हिंसाप्रिय क्रूर ग्रह है। यह जिस घर पर भी प्रभाव डालता है, उस पर चोट लगती है। केतु भी मंगल की तरह से चोट करता है। जन्मकुंडली में छठा घर चोट से संबंधित है। ग्यारहवां घर भी छठे ही की भौंति चोट देने वाला है, अत: जब मंगल केतु; इनके द्वारा अधिष्ठित राशियों के स्वामी, षष्ठेश (छठे घर का स्वामी) और एकादशेश (ग्यारहवें घर का स्वामी) किसी भाव तथा भावाधिपति पर अपना पूरा प्रभाव डाल रहे हों तो वो भाव जिस अंग का प्रतिनिधि हो, शरीर के उस अंग पर चोट लगती है। श्री हनुमान जी की पूजा आदि इसमें लाभ करती है।

कुछ खास जानकारियाँ

मंगल में अन्य ग्रहों की अपेक्षा एक बहुत ही खास बतत है। यह अपना अच्छा असए दिखाते-दिखाते जब कभी बुरा असर करता है, तो उसकी चाल में अचानक बहुत तेजी आ जाती है। फिर तेज चाल से यह बुरा असर डालना शुरू कर देता है। जब तक इसके मन्दे असर को रोकने के लिए कोई उपाय ‘किया जाए; तब तक यह इतना भारी नुकसान कर देगा, जिसकी भरपाई करने में बहुत लम्बा वक्त गुजर जाएगा, कभी-कभी तो इसके मन्दे असर को रोकना ही नामुमकिन .हो जाता है। लाल किताब के लेखक का मत है कि इसके मन्दे असर को चन्द्र की मदद से दूर किया जा सकता है। 

मंगल ग्रह का प्रभाव और उपाय

  • मंगल के बारे में यह कहा जाता है कि यह मेष लग्न वाले इंसान की आयु का पूर्ण प्रतिनिधि होता है, क्योंकि उसका पहला और आठवां दो आयु जगह पर अधिकार हो जाता है । ऐसा मंगल यदि शनि आदि पापी ग्रहों के प्रभाव में हो तो यह आयु की अल्पता का द्योतक होता है। ऐसी हालत में आयु बढ़ाने के लिए मंगल को बलवान्‌ करना आवश्यक हो जाता है।
  • मंगल को मजबूत करने के लिए, मंगल का रत्न मूंगा पहन ना चाहिए और शनि आदि जो पाप ग्रह मंगल पर प्रभाव डाल रहे हों, उनके मंत्र का जाप आदि कराकर, उनकी शांति करनी चाहिए। यदि वृश्चिक लग्न में चन्द्र मौजूद हो तो मंगल पूरी तरह से रक्त का प्रतिनिधि होता है। ऐसी हालत में अगर मंगल पर शनि और राहु का प्रभाव हो तो समझ लेना चाहिए. कि जातक के खून में मलिनता आदि रोग पैदा होंगे। रक्त की सफाई के लिए मंगल का बलवान्‌ होना बहुत जरूरी है और इसके लिए चौंदी की अँगूठी में मूंगा लगवाकर पहना जा सकता है। शनि और राहु की शांति का निवारण वैदिक या धार्मिक विधि से करना चाहिए ।
  • यदि मंगल लग्नेश (लग्न का स्वामी) हो और छह, आठ या बारहवें घर में स्थित हो और उस पर सिर्पा पापी दृष्टि हो और किसी शुभ ग्रह की युति अथवा दृष्टि का प्रभाव इस पर न हो तो जातक के पुदठे सूख जाते हैं और किसी भी औषधि से यह रोग दूर नहीं होता। इसके लिए चांदी की अँगूठी में मूंगा पहनना चाहिए। यह उपाय रोग को दूर करने में सक्षम होता है। यदि मंगल का युति अथबा दृष्टि संबंध पहला घर और उसका मालिक, चौथा घर और उसका मालिक तथा चंद्र से हो तो ऐसे जातक का मन अतीब हिंसक होगा। अतः ऐसे मंगल की शांति हनुमान जी के स्त्रोत्र पाठ आदि के द्वारा की जानीं चाहिए।
  • जब मंगल पहले घर का मालिक हो और चौथे घर में नीच का हो तो जातक को छाती आदि के रोग की समस्या होती है तथा धन का नाश भी संभव  होता है। इसके लिए भी चांदी की अँगूठी में मूंगा लगवाकर धारण करना लाभदायक रहता है। इस प्रक्रिया से उम्र, सेहत और दौलत का कभी नाश नहीं होता अथवा इन तीनों में लाभ ही लाभ होता है।
  • यदि मंगल और केतु का मिलाप या उनकी टष्पट का प्रभाव पांचवें 
  • और उसके स्वामी और बृहस्पति पर हो तो जातक के पुत्रों की मौत या उनके अभाव का कारण बनता है और यदि पांचवें घर का स्वामी बलवान्‌  होकर पीड़ित हो तो पुत्रों की मृत्यु तक संभव हो जाती है। पुत्र-मरण के
  • दोष दूर करने के लिए जहाँ पांचवें घर के मालिक (स्वामी) को रत्न आदि धारण करने. से बलवान्‌ करना अभीष्ट होगा, वहाँ मंगल के उपाय के लिए श्री हनुमान जी की पूजा-अर्चना कौ जानी चाहिए।
  • सातवां घर पुरुष की जन्मकुंडली में स्त्री का और स्त्री की कुंडली में पुरुष का होता है। पुरुष के सातवें घर का कारक अर्थात्‌ स्त्री का कारक शुक्र होता है और स्त्री के सातवें घर का कारक अर्थात्‌ पति का कारक बृहस्पति होता है। जब सातवां घर, उसका मालिक और शुक्र पीड़ित हों तो पुरुष की स्त्री (पत्नी) की मृत्यु का योग बनता है और जब स्त्री की कुंडली में सातवां घर, सातवें घर का मालिक और बृहस्पति पीड़ित हों रहा हो तो उस स्त्री के पति की कम होकर, उसके लिए  (विधवा) होने का योग बनता है।

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