बगलामुखी मंत्र एवं जाप विधि

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निम्नलिखित तंत्र मंत्र प्राचीन तंत्र मंत्र साहित्यो से लिए गए हैं! जैसे इंद्रजाल, लाल किताब, शाबर मंत्र संग्रह इत्यादि|

बगलामुखी मंत्र एवं जाप

10 महाविद्याओं में माता बगलामुखी आठवीं महाविद्या हैं, इन्हें माता पितांबरा भी कहते हैं, माता बगलामुखी स्तंभन की देवी हैं, संपूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है. 10 महाविद्याओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध प्रचलित एवं प्रभावी साधना बगलामुखी देवी की है. हम आपको देवी बगलामुखी के प्रादुर्भाव, इनके द्वारा रचित, मारण, मोहन, उच्चाटन आदि विद्या, इनके द्वारा त्रिखुरासुर का बध, इनकी साधना विधि, मंत्र साधना, इनके पूजन से मिलने वाले लाभ और माता बगलामुखी के पूजन विधि को बताने वाले हैं, 

माता बगलामुखी स्वरुप कैसा होता है। 

पहले हम माता बगलामुखी के परिचय को जान लेते हैं, उसके बाद पौराणिक कथा की तरफ बढ़ेंगे,माता बगलामुखी का मूल नाम बगलामुखी है, इस देवी का एक नाम पितांबरा देवी भी है, इनका प्रिय रंग पिला है, देवी बगलामुखी का स्वभाव सौम्य उग्रह है, यह देवी अपने हाथों में गधा और तलवार धारण की हुई हैं, दुष्टों का सहार और अपने भक्तों की रक्षा करना ही इनके अस्त्र शस्त्र धारण करने का उद्देश्य है, श्री बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र के नाम से भी जाना जाता है, अहक या पारलौकिक वाली हैं, देवी त्रिनेत्रा हैं, मस्तक पर अर्ध चंद्र धारण करती है, पीले शारीरिक वर्ण युक्त है, देवी ने पीला वस्त्र तथा पीले फूलों की माला धारण की हुई है,

देवी के अन्य आभूषण भी पीले रंग के ही हैं तथा अमूल्य रत्नों से जड़ित हैं, देवी विशेषकर चंपा फूल, हल्दी की गांठ इत्यादि पीले रंग से संबंधित तत्वों की माला धारण करती हैं, यह रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो, शत्रुओं का नाश करती हैं, देवी ने अपने बाएं हाथ से शत्रु के जहवा को पकड़कर खींच रखा है तथा दाएं हाथ से गधा उठाए हुए हैं जिससे शत्रु अत्यंत भयभीत हो रहा है देवी के इस जिवहा पकड़ने का तात्पर्य यह है कि देवी वाक शक्ति देने और लेने के लिए पूजी जाती हैं कई स्थानों में देवी ने मृत शरीर या शव को अपना आसन बना रखा है 

माता बगलामुखी सर्वप्रथम उपासना किसने की थी। 

सर्वप्रथम ब्रह्मा जी ने बगला महाविद्या की उपासना की थी बगलामुखी के दूसरे उपासक भगवान विष्णु और तीसरे उपासक परशुराम हुए तो अब चलिए बिना देरी किए वे माता बगलामुखी के प्रादुर्भाव के कथा की तरफ बढ़ते हैं और जानते हैं माता बगलामुखी के दिव्य कथा को।  

माता बगलामुखी कैसा अवतार लिया। 

एक बार की बात है जब गणेश जी कार्तिके जी मारकंडे जी अन्य देवगण माता काली के मुखमंडल से उनके 10 महाविद्या के प्रादुर्भाव और पूरे ब्रह्मांड की प्रलय और सृष्टि की की रहस्य को सुन रहे थे तो माता काली स्वयंयम अपने मुख से 10 महाविद्याओं में से अपने आठवां महाविद्या की प्रादुर्भाव की कथा सुनाते हुए कहती हैं कि हे देवगण बात उस समय की है

जब सृष्टि और ब्रह्मांड का निर्माण हो चुका था काल चक्र अपनी गति से चल रहा था और मेरे साथ महाविद्या का भी प्रादुर्भाव हो चुका था अब सृष्टि को एक नई विद्या की आवश्यकता थी मेरे इस महाविद्या के प्रादुर्भाव का कारण यह भवंडर धीरे-धीरे ब्रह्मांड में उपस्थित उल्का पिंडों और नवग्रह को भी निगलते जा रहा था चारों तरफ तूफान ही तूफान था समय के अनुसार यह भवंडर एक विशाल रूप में परिवर्तित होते जा रहा था,

इस संकट को देखकर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चिंतित हो उठे, इस समस्या का कोई हल ना हो पाया तो वे भगवान शिव का स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव उनसे कहा कि हे देव, शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता, अतः आप उनकी शरण में जाइए, तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा देव हरिद्रा सरोवर के निकट पहुंचकर देवी महा त्रिपुरा सुंदरी का स्तुति करने लगे,

इनके स्तुति से प्रसन्न होकर महा त्रिपुर सुंदरी प्रकट हुई देवी शक्ति ने विष्णु जी और ब्रह्मा देव को बोली कि हे देव आप चिंतित ना हो मुझे आपके आगमन के कारण ज्ञात है इतना कहते हुए माता त्रिपुरा सुंदरी के हृदय से देवी बगलामुखी का प्रादुर्भाव हुआ 

देवी बगलामुखी ने त्रिपुरा सुंदरी के आदेश पाकर त्रिखुरासुर से युद्ध करने को प्रस्तुत हुई माता बगलामुखी ने त्रिखुरासुर के ऊपर सर्वप्रथम मोहन विद्या का प्रयोग किया, जिससे त्रिखुरासुर मोहित हो गया, इसके पश्चात देवी ने स्तंभन विद्या का प्रयोग कर विशाल

काय भवंडर को स्तंभित करके सभी ग्रहों और नक्षत्रों को उसके संकट से मुक्त कराया, मोहन विद्या के प्रभाव में आकर त्रिखुरा सूर की बुद्धि भ्रमित हो गया, इसके बाद देवी ना उच्चाटन विद्या का प्रयोग किया, जिससे त्रिखुरासुर एक पागल की भाति भटकने लगा, इसके बाद देवी ने खुरासुर का वध करके इस संसार को संकट मुक्त कराया 

माता बगलामुखी किन-किन विद्या का प्रयोग करती है। 

स्तंभन, मोहन, उच्चाटन विद्या एक ऐसी विद्या होती है, जिसका प्रयोग कर प्रबल से अति प्रबल शत्रु के बुद्धि को अपने वश में किया जा सकता है, उसके बुद्धि को स्तंभित कर उसका सर्वानाश किया जा सकता है, यह विद्या व्यक्ति को दिमागी स्तर पर प्रहार करती है,

लेकिन एक बात का हमेशा ध्यान में रखें, इस विद्या का अनुचित प्रयोग करने पर निर्दोष जीवों को सताने पर प्रकृति के विरुद्ध इसका प्रयोग करने वाले व्यक्ति का अंत बहुत कष्टदाई होता है स्वयं माता बगलामुखी ऐसे साधकों का सर्वनाश करती हैं, उन्हें दंडित करती हैं. यह दुष्ट साधकों के लिए एक चेतावनी है, इसका प्रयोग केवल धर्म के रक्षा हेतु करना ही उचित माना गया है. 

माता बगलामुखी साधना विधि।

अब आपको माता के पूजन व साधना विधि को बताते हैं. देवी बगलामुखी के साधना के लिए आप एक स्वच्छ स्थान का चुनाव करें, घर, मंदिर या फिर कोई अन्य स्थान जो स्वच्छ हो और आपके साधना के लिए उत्तम हो, साधना के समय आप पिला वस्त्र ही धारण

करें और आसन भी पीले ही रंग की होना चाहिए, मंत्र जाप के लिए हल्दी के माला का प्रयोग करें, देवी को पीले हल्दी के ढेर पर दीप दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढ़ाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मंत्रों से दुखों का नाश होता है,

पूजा में कोई अनुचित चीज नहीं मांगे, जो समाज कल्याण के विरुद्ध हो, आपके साधना या पूजा का उद्देश्य किसी को आहत पहुंचाने का नहीं होना चाहिए, जो न्याय प्रिय और सर्वप्रिय हो, उसी की कामना करें, बगलामुखी विद्या का उपयोग भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति के लिए किया जा सकता है, 

इनकी उपासना से हर दुर्लभ वस्तु प्राप्त हो सकती है, परंतु विशेष रूप से स्तंभन, शत्रु शमन, युद्ध, वाद, विवाद, मुकदमा, प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने के लिए बगलामुखी अमोघ है, इस शक्ति की आराधना करने वाला मनुष्य अपने शत्रु को मनमाना कष्ट पहुंचा सकता है और अपने ऊपर आए कष्टों का निवारण भी कर सकता है, 

मंत्र का जाप प्रतिदिन अपने योग्यता अनुसार करें, मंत्र जाप में आप हल्दी के माला का प्रयोग करें, मंत्र जाप से पूर्व माता बगलामुखी का सामान्य पूजा करें, मंत्र जाप से शत्रु शांत होता है, कार्य शीघ्र सिद्ध होता है और देवी की कृपा आप पर सदैव बना रहता है, अगर किसी  व्यक्ति को किसी भी काम में सफलता नहीं मिल रही है तो वे इस मंत्र का जाप जरूर करें, यह मंत्र सफलता दिलाने में उत्तम है,

 

बगलामुखी मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ

देवी बगलामुखी ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली विद्या में से एक है बगला मुखी माता का बगला भी कहा जाता है यह दस महा विद्या में से एक है बगलामुखी की पूजा से जातक का भ्रम दूर होता है बगलामुखी मंत्र शत्रु पर विजय प्राप्त करने का एक अच्छा शस्त्र है यह दुश्मनो का शक्तिहीन बना देता है यह विरोधियो की बुरी नजर , काला जादू क़ानूनी करवाई और दुर्घटना से सुरक्षा प्रदान करता है अगर इस मंत्र का जप मन में बुरे विचार के साथ किया जाए तो इसका बुरा परिणाम हो सकता है   

बगलाया वा बगलामुख्या

मंत्र –

 ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्व-

दुष्टानां वाचमुखं स्तम्भय जिह्नां कालय बुद्धि नाशय ह्रीं 

ॐ स्वाहा ।

बगलामुखी मंत्र का जाप कैसे करें

  • बगलामुखी मंत्र का जप करने का सबसे अच्छा समय सुबह 4 बजे से 6 बजे का ब्रह्म मुहूर्त होता है।
  • स्नान करने के बाद एक चटाई लें। इस पर बैठ जाएं।
  • प्रतिदिन एक माला जप करे 
  • बगलामुखी की एक छवि अपने सामने रखें।
  • मंत्र का उच्चारण स्पस्ट करे। 
  • देवी बगलामुखी को पीले फूल अर्पित करे इससे वह जल्द ही प्र्सन होगी।

माता बगलामुखी मंत्र का जाप करने के लाभ

  • यह मंत्र शत्रुओं को शांत करता है और उनसे छुटकारा मिलता है 
  • आपके शत्रु द्वारा आपके खिलाफ रचा गया किसी भी तरह का सरयंत्र असफल होता है 
  • इस मंत्र से आप अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा महसूस करेंगे जिससे की आप को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है 
  • यह मंत्र आपके कार्य में आरही बाधा को दूर करता है और आपके अधूरे कार्य को पूरा होने में मदत मिलती है 
  • इसका सबसे बड़ा लाभ है यह की है यह आपकी मानसिक बीमारियों को दूर करता है और आपका मन हल्का होता है 

 

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यह भी पढ़े:-

  1. शक्तिशाली दुर्गा मंत्र
  2. गणेश मंत्र
  3. शक्तिशाली सूर्य
  4. वशीकरण मंत्र
  5. विष्णु मंत्र

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