गणेश मंत्र

Tantra Mantra

गणेश मंत्र | गणेश बीजं मंत्र | अर्थ, महत्व और लाभ

निम्न लिखित गणेश मंत्र बहुत प्रभावशाली है। Tantramantra.in एक विचित्र वेबसाइट है जो की आपके लिए प्राचीन तंत्र मंत्र सिद्धियाँ टोन टोटके पुरे विधि विधान के साथ लाती है. TantraMantra.in कहता है सभी तांत्रिक मित्रों को इन कार्यविधियों को गुरु के मध्य नज़र ही करना चाहिये। तथा इन इलमो को केवल अच्छे कार्य में ही इस्तेमाल करना चाहिए, अन्यथा आपको इसके बुरे परिणाम का सामना खुद ही करना होगा ।

निम्नलिखित तंत्र मंत्र प्राचीन तंत्र मंत्र साहित्यो से लिए गए हैं! जैसे इंद्रजाल, लाल किताब, शाबर मंत्र संग्रह इत्यादि|

गणेश मंत्र

आज हमआपको भगवान श्री गणेश की साधना बताएंगे,भगवान श्री गणेश रिद्धि, सिद्धि और बुद्धि के देवता है, क्योंकि इसके साथ-साथ यह अग्र पूजा के अधिकारी भी हैं, रिद्धि और सिद्धि भगवान श्री गणेश की पत्नी है. और बिना उनकी आज्ञा के वह किसी भी साधक को सिद्धि प्रदान नहीं करती, जब पूरे संसार की, पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने की बात आई

तो भगवान श्री गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करने लगे, इससे यह पता चलता है कि भगवान श्री गणेश कितने बुद्धिमान है और अपने माता-पिता से बढ़कर वह पूरे ब्रह्मांड को नहीं मानते, इसी कारण से उनको अग्र पूजा का अधिकारी बनाया गया 

हर देवी देवता की पूजा से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा करी जाती है उनकी आराधना करी जाती है, अगर आपने उनकी पूजा नहीं करी, उनकी साधना नहीं करी या उनका नाम नहीं लिया, जरूरी नहीं है कि बहुत लंबी चौड़ी साधना करो, 10-10 माला का जाप करो या एक माला का जाप करो, अपने दिल से, अपने हृदय से उनको दो बार तीन बार बस उनको नमस्कार कर दो, उसी से काम चल जाता है, उसी उसी से आपकी पूजा सफल हो जाती है,

देखिए भगवान श्री गणेश विघ्न हरता भी है और विघ्न करता भी है, अगर यह आपकी साधना में आने वाले विघ्नों को दूर कर सकते हैं तो आपकी साधना में विघ्न डाल भी सकते हैं अगर आपने इनका नाम नहीं लिया, इसी कारण से इनको अगर पूजा का अधिकारी कहा जाता है, 

भगवान श्री गणेश को विष्णु जी का अंश क्यों कहा जाता है।

भगवान श्री गणेश को विष्णु जी का अंश भी कहा जाता है, क्योंकि यह बात आती है गणेशः साक्षात कृष्णा, इसमें यह बात इसलिए हमें पता चलती है,क्योंकि जब माता पार्वती जब माता पार्वती अपने शरीर के उपटन से भगवान श्री गणेश की मूर्ति का निर्माण कर रही थी, और उसमें प्राण डाल रही थी, उस वक्त वो भगवान श्री हरि विष्णु जी का ध्यान कर रही थी, अपने भाई का ध्यान कर रही थी, जिसके कारण से विष्णु जी का अंश भगवान श्री गणेश के अंदर समा गया और इसीलिए उनको भगवान श्री हरि विष्णु का अंश भी कहा जाता है,

किसी भी साधना को करने से पहले गणेश जी पूजना क्यों आव्यशक होता है। 

जो साधक लोग हैं जो साधनाएं करते हैं अपने जीवन काल में उनको भगवान श्री गणेश की साधना एक बार अवश्य करनी चाहिए, एक बार अपने जीवन में सवा लाख का अनुष्ठान कर लो और उसके बाद नित्य एक माला का जाप करो, इससे इसके बाद होगा क्या? आप जो भी साधना करोगे, चाहे वह कैसी भी साधना हो, उस साधना में आपने कितनी भी गलतियां कर दी हो और लाख गलतियां कर दी हो, लाख भूल चूक कर दी हो, तब भी आपको सिद्धि प्राप्त हो जाएगी भगवान श्री गणेश के आशीर्वाद से, क्योंकि रिद्धि और सिद्धि बिना श्री गणेश की आज्ञा के नहीं चलती, इसलिए साधना के क्षेत्र में बहुत जरूरी होता है

गणेश की पूजा करने से कुंडली में क्या अंतर आता है। 

भगवान श्री गणेश की पूजा करना, भगवान श्री गणेश का नाम लेना, इसके साथ-साथ अगर आपकी कुंडली में राहु, केतु और बुध कितनी भी खराब दशा में हो और भगवान श्री गणेश की पूजा करने से, उनकी साधना करने से राहु, केतु और बुध आपको अच्छा फल देने लगते हैं, आपके जीवन में उन्नति के रास्ते खोल देते हैं, तरक्की के रास्ते खोल देते हैं, चाहे आप किसी भी फील्ड में हो, चाहे आप किसी भी लाइन में हो, जिस लाइन में आप काम करोगे, उस लाइन में आपको सफलता मिलने लगेगी, 

श्री गणेश जी की साधना और विधि। 

अब बात करते हैं साधना की तो भगवान श्री गणेश का जो हम मंत्र बताने वाला है। आपको, यह अथर्व शीर्ष में से लिया गया मंत्र है और छोटा सा मंत्र है, बीज मंत्र है,ये यह मंत्र आप लोग अच्छी तरह से जानते भी हो तो सबसे पहले मैं आपको मंत्र बता देता हूं, उसके बाद साधना की विधि बताऊंगा, मंत्र सुन लीजिए, मंत्र इस प्रकार है, 

मंत्र

ओम गंग गणपतय नमः, ओम गंग गणपतय नमः,

विधि- इस मंत्र का जाप करना है, आपको नहा धो कर के साफ सुथरे कपड़े पहनने हैं और आसन पर बैठना है, आपको अपने सर के ऊपर कपड़ा रखना है, अपने सामने गणेश जी की मूर्ति स्थापित करनी है या फोटो रख सकते हैं फोटो के बाद आपको धूपबत्ती जलानी है, दीपक जलाना है, थोड़ा सा जल का लोटा रखना है, उसमें गंगाजल डाल के रखना है, सारी सामग्री पर जल छिड़कना है, अपने ऊपर जल छिड़कना है, उसके बाद संकल्प लेकर के रुद्राक्ष की माला लेनी है, आपको आप चंदन की माला भी ले सकते हो, तुलसी की माला भी ले सकते हो और मूंगे की माला भी ले सकते हो,

इन सभी मालाओं में से जो माला आपके पास हो उस माला से आप जाप कर सकते हो और आपको सवा लाख का अनुष्ठान करना है, सवा लाख के अनुष्ट करने के बाद आपको हवन करना है, हवन आप 108 भी कर सकते हो, 1008 की संख्या में भी कर सकते हो, मैं 108 बार इसलिए कह रहा हूं कि अगर ज्यादा ज्यादा मात्रा में हवन करने की सामर्थ्य आपकी नहीं है तो कम से कम 108 आहुतियां तो आपको करनी चाहिए 108 आहुतियां जरूर करनी पड़ेंगी,

आपको इसके बिना काम नहीं चलेगा तो इतना करने से आपका सवा लाख का अनुष्ठान पूरा हो जाएगा और उसके बाद आप रोज एक माला का जप करिए और अपने जीवन में चमत्कार देखिए, 

आप किसी भी फील्ड में होंगे, उस फील्ड में आपको उन्नति मिलने लगेगी, उस फील्ड में आपको तरक्की मिलने लगेगी, चाहे आप जॉब करते हो, चाहे आप बिजनेस करते हो, चाहे आप मार्केटिंग में हो, चाहे आप एक साधक हो, एक भगत हो, एक तांत्रिक हो, जो भी हो आप आप जिस भी फील्ड में होंगे हों गेउस फील्ड में आपकी उन्नति होने लगेगी, आपकी शक्ति जागृत होने लगेगी,

जब शक्ति जागृत होगी तो अपने आप ही क्रिएटिविटी आएगी, अपने आप ही सब कुछ होने लगेगा, अपने आप ही उन्नति होने लगेगी, अपने आप ही मान सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, धन धान्य, यश कीर्ति, वैभव, सब कुछ मिलने लगेगा, आपको, आपको ज्यादा कुछ करना भी नहीं पड़ेगा,

गणेश मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ

किसी भी पूजा को करने से पहले गणेश जी को पूजा जाता है क्योकि इन्हे सबसे पहले पूजने का वरदान मिला है गणेश जी कि पूजा करने से किसी भी तरह की मुस्कील विपप्ति को आसानी से दूर करने में मदद मिलती है। बड़ी संख्या में भगवान गणेश को गणपति बप्पा के नाम से जाना जाता है। वह कला और

विज्ञान के संरक्षक हैं गणेश जी को शिव जी ने प्रथम पूजनीये का वरदान दिया था हिंदू धर्म के अनुसार, श्री गणेश हर अच्छी और सकारात्मक चीज की शुरुआत का संकेत देते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश स्वयं बुद्धि के अवतार हैं और अन्य दो व्यक्तित्व, सिद्धि और रिद्धि को देवी माना जाता है। इन दो देवियों को गणेश जी की पत्नी भी कहा जाता है।

गणेश बीजं मंत्र 

मंत्र

गं ।

हरिद्वा गणेश बीजं मंत्र 

मंत्र –

ग्ल॑ ।

महा गणेश बीजं मंत्र 

मंत्र –

ओं  श्रीं  ह्लीं  क्लीं  ग्लौं  गं  गणपतये वर-वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

गणेश मंत्र का जाप कैसे करें

  • गणेश जी के मंत्रो का पुन रूप से लाभ पाने के लिए इन मंत्रो का जप पुरे नियमो के साथ करना चाहिए 
  • पाठ करने के पहले अपना शरीर स्वच्छ और मन को शांत कर लेना चाहिए स्नान आदि कर के साफ़ सुथरे वस्त्र पहन के मंत्र का जाप करना चाहिए 
  • मंत्र का उच्चारण श्रद्धा और विसवास के साथ करना चाहिए 
  • मंत्र का जाप करते समय सभी चिंताओं और गलत विचारों को दूर कर दे 
  • मंत्र का उच्चारण सही और स्पष्ट करे। 

गणेश मंत्र के जाप के लाभ

  • इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति का मागणेश मंत्रर्गदर्शन होता है और वह उसका अनुसरण करता है।
  • यह मंत्र व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से प्रबुद्ध बनाता है और उसके लिए कई अवसरों के द्वार खोलता है। वह भौतिक संतुष्टि प्राप्त करता है और समाज में उसका प्रभाव व्याप्त होता है।
  • गणेश जी के मंत्र के नियमित पाठ करने से जातक का करियर में सफलता मिलती है और उसका पारिवारिक जीवन में भी सुधार होगा ।
  • इस मंत्र का जाप करने से बाधाओं से छुटकारा मिलता है जो इस समय उसके जीवन में मुसीबत का कारण बनी हैं।
  • इसके निरयंतर जाप से आप अपने व्यक्तिगत नेतृत्व के चरित्रों को बेहतर कर सकते है।  

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यह भी पढ़े:-

  1. तांत्रिक क्रिया हटाने के उपाय
  2. मसान को हटाने का मंत्र
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  4. वशीकरण मंत्र
  5. बगलामुखी मंत्र एवं जाप विधि

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