काल भैरव मंत्र

Tantra Mantra

2 सिद्ध काल भैरव मंत्र | siddh kaal bhairav mantra

निम्न लिखित काल भैरव मंत्र बहुत प्रभावशाली है। Tantramantra.in एक विचित्र वेबसाइट है जो की आपके लिए प्राचीन तंत्र मंत्र सिद्धियाँ टोन टोटके पुरे विधि विधान के साथ लाती है. TantraMantra.in कहता है सभी तांत्रिक मित्रों को इन कार्यविधियों को गुरु के मध्य नज़र ही करना चाहिये। तथा इन इलमो को केवल अच्छे कार्य में ही इस्तेमाल करना चाहिए, अन्यथा आपको इसके बुरे परिणाम का सामना खुद ही करना होगा ।

कुदरती टोटके जो मनुष्य पढ़कर खुद करेगा उसी का कार्य पूर्ण होगा और जो दूसरे को पढ़कर बतायेगा जिसको बतायेगा उसका कार्य नहीं होगा, जो पढ़ेगा और बिना किसी व्यक्ति को बताये करेगा उसी का कार्य सम्पूर्ण होगा।

निम्नलिखित तंत्र मंत्र प्राचीन तंत्र मंत्र साहित्यो से लिए गए हैं! जैसे इंद्रजाल, लाल किताब, शाबर मंत्र संग्रह इत्यादि|

काल भैरव मंत्र

विधि –  एक काले रंग का त्रिबुजाकार पत्थर लेकर काले रंग और चमेली के तेल को मिलाकर उसे रंग दें और किसी धरातल पर सीधा खड़ा कर दें। शनिवार की रात्रि में इसके सामने सरसों के तेल का अखण्ड दीप जलायें। दो लौंग रखें, नारियल.तथा पान की पूजा रखें। मदिरा का भी प्रबन्ध रखें।

अब इसके सामने धूप जलाकर काल भैरव मंत्र का जाप आरंभ करें। कम से कम एक माला तो अवश्य जपे और रात में इसी तरहा पाठ करते रहे काले कुत्ते को खीर, हलुवा खिलावें। मन्दिर में भेरों जी के दर्शन भी करे यह कार्य नियंमित चलना चाहिए। शीघ्र ही भैरों जी दर्शन देंगे तब भैरों जी को मांस, मदिरा का भोग प्रस्तुत करें और आगे जैसा आप चाहेवैसा करें।

मंत्र –  
ॐ नमो आदेश गुरु को। काला भैरव, काला केश।
कानों मुन्दरा, भगवा वेष। मार मार काली पुत्र बारह कोस की मार।
भूतां हाथ काले जी खूंहा। गेड़िया जहां जाऊं भैरों साथ।
बारह कोस की ऋद्धि लाओ। चौबीस कोस की सिद्धि लाओ।
सोती होय जगाय लाओ। बैठी होय उठाय लाओ।
अनन्त केशर की भारी लाओ। गौरा पार्वती की बिछिया लाओ।
गेल्यां की रस्सतान मोह। कुएं बैठी पणिहारी मोह।
गद्दी बैठा बणिया मोह। गृह बैठी ‘बणियनी मोह।
राजा की रजवाड़िन मोह। महलों बैठी रानी मोह।
डाकिनी को। शाकिनी को। भूतिनी को। पपलीतनी को।
औपरी को। पराई को। लाग को। लपटाई को।

धूम को। धक्का को।  पलीया को चौड़ को।
चुगाठ को। काचा को। कलवा को। भूत को।
पलीत को। जिन को। राक्षस को।
बैरिनों से बरी कर दे। नजरों जड़ दे ताला।
इत्ता भैरव न करे तो पिता महादेवकी जटा तोड़ तागड़ी करे।
माता पार्वती का चीर फाड़ लंगोट करे।चल डाकिनी शाकिनी।
चौड़ूं मैला बाकरा। देऊं मद की धार।
भरी सभा में धूं आने में कहां लगाई बार। खप्पर में खाय मसान में लोटे।
ऐसे काला भैरों की कुण पूजा मेटे।
राजा मेटे राज से जाये। प्रजा मेटे, दूध पूत से जाये।
जोगी मेटे ध्यान से जाये शब्द सांचा पिण्ड कांचा 
फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा 

काल भैरव मंत्र

विधि –  इस काल भैरव मंत्र का प्रयोग भी पूर्व वर्णित मंत्र के प्रयोग की भांति इसके जप से भी श्री भैरव जी दर्शन देते हैं।

मंत्र – 
ॐ  काली कंकाली। महाकाली के पुत्र।
कंकाल भैरव हुकूम हाजिर रहे।
मेरा भेजा रक्षा करे। आन बांधूं 
बान  बांधूं  फूल में भेजूं फूल में जांय।
कोठे जी पड़े थर-थर कांपे। हल हल हलें।
गिरि गिरि परे। उठि उठि भगे।
बक बक बके। मेरा भेजा सवा घड़ी।
‘पहर सवा। दिन सवा।मास सवा।
सवा बरस को बावला न करे ।
तो माता काली की शय्या पे पग धरे 
वाचा चुके  तो उमा सूखे 

वाचा छोड़ कुवाचा करे धोबी की नांद 
चमार के कुढ़े में पड़ै
मेरा भेजा बावला न करे।
तो रुद्र के नेत्र से आग की ज्वाला कढ़ै।
सिर की जटा दूट भूमि में गिरे।
माता पार्वती के चीर पे चोट पढ़े।
बिना हुकुम नहीं मारना।
हे काली के पुत्र कंकाल भैरव
फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा ।
सत्य नाम आदेश गुरु को 

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