Tantra Mantra

किया कराया कैसे पता करे

विधि –  इस मंत्र को उच्चारित करते हुए फूंक मारने पर रोगी पर किया-कराया अपना परिचय देता है। 

मंत्र – 
ॐ औंकार सतगुरु प्रसादि।
दुहाई खुदा दी। दुहाई रसूल दी।
दुहाई पीर पैगम्बर की। दुहाई हजरत अली की।
दुहाई अम्बर की। दुहाई मुहम्मद अली  फकीर की।
दुहाई इक लख अस्सी हजार पैगम्बर दी।

दुहाई बावन वीर की। दुहाई चौंसठ योगिनी,
चौरासी सिध नव नाथ की।
साहापरी, बुबपरी, तखतपरी, हूरपरी,
नूरपरी, लालपरी, सफेदपरी।
साहा की दुहाई।

कौन कौन पकड़ चले।
आगे कलुवा वीर चले। य पीछे मुहम्मद वीर चले।
हनुमन्त वीर चले। लंकु ढीपा वीर चले।
हअंगद चले। बावण वीर, चौंसठ योगिनी।
सिध नौ नाथ हजरत साह भी।
मके बान नदी नाव का पुरा।

देव भूत जिन खवीसा
देवणी भुतणी जिननी खवीसनी
चुड़ैल के लागे तीर।
अद्टठाइस ठाम नौ सुता जाऊं।

मढी मसानी रक्खे विरख वेग से।
पकडिली आऊं  सिद्ध भैरों श्री बाला जती।
भैरों जती। लक्ष्मण जती।
कुमार जती। डोडा जती।
शुक्रजती। हणवंत जती।
अंगद जती।

भैरों भवाल क्षेत्रपाल।
‘कालका माई का पूत।
चढ़ी भदटी का जैतवार रौसा चले।
जैसे नदी नाव का तीर।

जिन, भूत को, देव को, पलीत को।
ख़वीस को, डाकिणि को, साकिणी को।
सिहारी को।

चार खूंट सैहं कारिलि आऊं।
बंद करे।
सिर चढ़ खेले। मुख चढ़ बोले।
गुरु की शक्ति। हमारी भक्ति।
‘फुरो मंत्र ईश्वर महादेव तेरी वाचा फुरै।

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